AI कंपनी Anthropic के एक सार्वजनिक आंतरिक सर्वेक्षण से पता चला है कि उसके तकनीकी विभाग में शुरुआती करियर वाले कर्मचारियों की भर्ती में भारी कमी आई है। नए कर्मचारियों में उनकी हिस्सेदारी 2025 की शुरुआत के 27% से घटकर 9% रह गई है। वहीं, कंपनी ने बताया कि अगस्त 2026 में उसके यहां AI एजेंटों के काम करने के घंटे इंसानों के मुकाबले छह गुना तक पहुंच गए।
AI के कामकाज में बढ़ोतरी के बीच शुरुआती करियर वालों के लिए जगह घट रही है
आंकड़ों को क्रम से देखें। Anthropic के तकनीकी विभाग में कुल कर्मचारियों में शुरुआती करियर वाले लोगों की हिस्सेदारी 2025 की शुरुआत के 21% से घटकर 14% रह गई। केवल नई भर्तियों की बात करें, तो गिरावट और भी बड़ी है: हिस्सेदारी 27% से घटकर 9% हो गई। शुरुआती करियर वालों के लिए सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध नौकरियां भी घटकर 6% रह गईं। बताया गया है कि दिसंबर 2025 के आसपास से यह गिरावट खास तौर पर दिखने लगी।
गैर-तकनीकी विभागों की तस्वीर इसके उलट है। वहां कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ और स्थिति मोटे तौर पर स्थिर रही। यानी यह बदलाव पूरी कंपनी में एक जैसा नहीं है; इसका असर उन तकनीकी भूमिकाओं में केंद्रित है, जहां AI एजेंटों की पैठ सबसे गहरी है।
कंपनी ने इसकी वजह AI एजेंटों की बढ़ती क्षमता को बताया है। शुरुआती करियर वालों की भर्ती में सबसे ज्यादा कमी उन भूमिकाओं में आई, जहां Claude जटिल काम करने में सक्षम है। हो सकता है कि सोच धीरे-धीरे इस ओर बदल रही हो कि “कर्मचारियों की कमी है, इसलिए भर्ती करो” के बजाय “सिर्फ वही काम इंसानों को सौंपो जो AI नहीं कर सकता।”
कोड से लेकर अनुबंधों की प्रक्रिया तक काम सौंपना
Anthropic में कोड लिखने और बग ढूंढने जैसे काम Claude को सौंपने के मामले बढ़ रहे हैं। मार्च 2026 के बाद से AI एजेंटों के काम करने के घंटे इंसानों से ज्यादा हो गए। अगस्त तक पूरी कंपनी में यह अनुपात 6:1 था, जबकि केवल शोध विभाग में यह बढ़कर 19:1 हो गया। यानी हर शोधकर्ता के साथ ऐसा AI काम कर रहा है, जिसके काम के घंटे 19 लोगों के बराबर हैं।
कंपनी ने विभागवार उत्पादकता के आंकड़े भी जारी किए हैं। इंजीनियरों के कोड कमिट की संख्या 5.1 गुना, डेटा वैज्ञानिकों के क्वेरी चलाने की संख्या 3.1 गुना और कानूनी विभाग में निपटाए गए अनुबंधों की संख्या भी 3.1 गुना रही। बिक्री में सौदों के सफलतापूर्वक पूरा होने की संख्या 1.7 गुना रही, जबकि भर्ती टीम द्वारा की गई नियुक्तियों और वित्त विभाग द्वारा संसाधित बिलों की संख्या—दोनों 1.4 गुना रही।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बढ़ोतरी हर विभाग में एक जैसी नहीं है। कोड जैसे काम, जिनके नतीजे ठोस रूप में सामने आते और लगातार जुड़ते जाते हैं, AI के साथ बेहतर तालमेल रखते हैं। वहीं, लोगों से बातचीत और मोलभाव वाले बिक्री या भर्ती के कामों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम है। इससे यह भी समझ आता है कि शुरुआती करियर वालों की भर्ती में कमी तकनीकी विभागों तक ही क्यों सीमित रही।
Anthropic एक असाधारण मामला भी है
यह सर्वेक्षण खुद Anthropic को एक असाधारण मामला बताता है। कंपनी ऐसी सॉफ्टवेयर कंपनी है जहां AI का इस्तेमाल बेहद व्यापक है, इसलिए इन नतीजों को पूरी अर्थव्यवस्था पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। कारोबार की तेज़ वृद्धि और कर्मचारियों द्वारा अपनी पहल पर AI टूल इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति का भी आंकड़ों पर असर हो सकता है।
फिलहाल पूरी अर्थव्यवस्था में AI के कारण उत्पादकता में कोई मापने योग्य बढ़ोतरी दिखाई नहीं दी है। यह मानने के बजाय कि आपके कार्यस्थल में भी जल्द ऐसा ही बदलाव आएगा, इसे एक शुरुआती उदाहरण के तौर पर पढ़ना बेहतर होगा—इससे पता चलता है कि AI का सबसे व्यापक इस्तेमाल करने वाली जगहों पर क्या हो रहा है।
क्या दक्षता बढ़ाने और प्रतिभा विकसित करने, दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है?
शुरुआती करियर वालों के काम महज सस्ता श्रम नहीं हैं। वे अनुभव हासिल करते हुए विशेषज्ञता विकसित करने का प्रवेश-द्वार भी हैं। अनुभवी विशेषज्ञों ने उन शुरुआती भूमिकाओं में वर्षों काम करके अपनी क्षमता बनाई है, जो अब खत्म होती जा रही हैं।
NATO स्पेशल ऑपरेशंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता Nolan Lovett ने इस स्थिति को “संज्ञानात्मक साझा संसाधनों की त्रासदी” कहा है और अपने शोधपत्र में इस पर चर्चा की है। अगर हर कंपनी नए कर्मचारियों के पदों की जगह AI को रखती है, तो दक्षता बढ़ने का फायदा उसी कंपनी को मिलता है। लेकिन कुछ साल बाद जब अनुभवी लोगों की जरूरत पड़ेगी, तो उसका बोझ पूरे समाज में बंट जाएगा—यह उनका तर्क है। इसे उस क्लासिक “साझा संसाधनों की त्रासदी” का प्रतिभा-विकास वाला रूप कहा जा सकता है, जिसमें सभी के इस्तेमाल से चरागाह खत्म हो जाता है।
Lovett का मानना है कि इसका असर 2030 से 2045 के बीच गंभीर रूप से सामने आएगा। इसकी वजह यह है कि आज सक्रिय विशेषज्ञों को 5 से 20 साल पहले तैयार किया गया था। सॉफ्टवेयर विकास, वित्तीय विश्लेषण और कानूनी शोध को विशेष रूप से प्रभावित होने वाले क्षेत्र माना गया है।
जब इंसानों के काम का स्वरूप ही बदल जाए
हालांकि, इस अनुमान में यह मानकर चला गया है कि भविष्य में भी इंसान ही ये काम करेंगे। लगता है कि Anthropic खुद ऐसा नहीं मानती। कंपनी पहले संकेत दे चुकी है कि प्रोग्रामर और कॉल सेंटर के कर्मचारियों को आगे चलकर इलेक्ट्रीशियन या नर्स जैसे कामों में जाना पड़ सकता है।
शुरुआती करियर वालों की भर्ती में कमी का सवाल सिर्फ एक कंपनी की भर्ती नीति तक सीमित नहीं है। दक्षता बढ़ने से बचा समय और लागत अगली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने में कैसे लगाए जाएंगे? जिस कार्यस्थल पर AI इंसानों से छह गुना ज्यादा घंटे काम कर रहा है, वहां प्रशिक्षु पदों को कैसे बचाए रखा जाएगा? इसका जवाब देने की जिम्मेदारी AI अपनाने वाली कंपनियों की है।


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